
योगी सरकार के सांस्कृतिक विजन से संवरती लोक परंपरा और संगीतमय सावन
उत्तर प्रदेश: राज्य में कला, संस्कृति एवं शास्त्रीय परंपराओं के संरक्षण तथा पुनरुद्धार के लिए प्रतिबद्ध योगी आदित्यनाथ सरकार के दूरदर्शी सांस्कृतिक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों की समृद्ध धरोहरें वैश्विक एवं राष्ट्रीय पटल पर पुनः स्थापित हो रही हैं। इसी क्रम में आजमगढ़ जनपद को राज्य सरकार द्वारा संगीत महाविद्यालय की ऐतिहासिक सौगात दिए जाने के उपरांत समूचे क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना एवं आयोजनों का एक नया स्वर्णिम अध्याय प्रारंभ हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार की इस सतत प्रोत्साहन नीति और कला-संस्कृति के संवर्धन के संकल्प से अनुप्राणित होकर आजमगढ़ की इस उर्वर संगीतमय भूमि पर पारंपरिक कजरी और लोक संस्कृति का एक अत्यंत भव्य एवं मनमोहक उत्सव साकार हुआ।
अवसर था हरिहरपुर संगीत घराना ट्रस्ट एवं हरिहरपुर घराना संगीत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘भव्य हरिहरपुर कजरी महोत्सव’ का। हरिहरपुर संगीत अकादमी परिसर में आयोजित इस गरिमामय एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम का औपचारिक एवं विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) विजय बहादुर पाठक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विजय बहादुर पाठक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में संचालित सांस्कृतिक नीतियों एवं योजनाओं की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने रेखांकित किया कि अत्यंत सीमित संसाधनों एवं प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सच्चा कलाकार अपनी शास्त्रीय तथा लोक परंपराओं का त्याग नहीं करता। राज्य में वर्तमान सरकार द्वारा पारंपरिक एवं संकटग्रस्त कला विधाओं को दिए जा रहे निरंतर राजकीय संरक्षण, वित्तीय सहायता एवं सम्मानजनक मंचों के माध्यम से आज प्रदेश भर के कलाकारों का मनोबल अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आजमगढ़ की यह प्राचीन शास्त्रीय भूमि आने वाले समय में भारतीय संगीत जगत में अपना सर्वोच्च स्थान पुनः प्राप्त करेगी।
सुर, ताल और भावों का त्रिवेणी संगम
दो दिवसीय महोत्सव का संगीतमय आगाज प्रसिद्ध गायक अभिषेक मिश्र द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ‘गजानंद राखे लाज हमारी…’ के सुरम्य गायन से हुआ। तत्पश्चात् उन्होंने अपनी मधुर आवाज में ‘धन्य है ये धरा…’, पारंपरिक कजरी ‘बरसन लागी सावन बुंदिया राजा’ तथा कालजयी सूफी रचना ‘सांसों की माला पे…’ की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देकर संपूर्ण प्रांगण में उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में भक्ति रस की धारा प्रवाहित हुई। सुप्रसिद्ध भजन गायक उमेश सिंह राठौर ने ‘लगन तुमसे लगा बैठे’ और ‘कहियो दर्शन दीहे हो…’ जैसे भजनों के माध्यम से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना एवं भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। इसके उपरांत प्रख्यात गायिका सपना बनर्जी ने अपनी बहुआयामी गायन शैली का परिचय देते हुए ‘देखो सांवरे के संग गोरी झूले हिंडोला…’ तथा ‘हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया’ जैसी सुरीली प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पारंपरिक कजरी की मनमोहक तान से गूंजा प्रांगण
महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में पारंपरिक कजरी विधा के पुरोधाओं एवं उभरते कलाकारों ने मंच संभाला। कलाकार अनिल मिश्रा, आदर्श मिश्र, हृदय मिश्र एवं नितीश मिश्र ने संयुक्त एवं एकल प्रस्तुतियों के माध्यम से पूर्वांचल की अमूल्य लोक धरोहर को जीवंत कर दिया। उन्होंने ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया’, ‘रेलिया बैरंग पिया को लिये जाए रे’ और ‘दरोगा जी हो, चार दिन से पियवा बा लापता’ जैसी लोकप्रिय एवं भावपूर्ण कजरियों का ऐसा समां बांधा कि उपस्थित विशाल जनसमूह झूमने पर मजबूर हो गया।
गायन प्रस्तुतियों की सफलता में वाद्य संगीत की सुसंगत भूमिका बेहद सराहनीय रही। ‘विशाल एंड ग्रुप’ की संगीत टीम में की-बोर्ड पर बादल मिश्र, तबले पर विशाल मिश्र व अभिषेक मिश्र तथा ऑटोपैड पर संदीप मिश्र ने अपनी जादुई संगति एवं लयबद्धता से पूरी महफिल को संगीतमय ऊर्जा से भर दिया।
तीन दशकों की अटूट साधना और संकल्प
विगत तीन दशकों (30 वर्षों) से निरंतर पूर्वांचल की लोक परंपराओं एवं शास्त्रीय संगीत को समर्पित भाव से सहेजने वाले संस्था प्रमुख एवं कार्यक्रम व्यवस्थापक अजय मिश्र के अपरिहार्य स्वास्थ्य कारणों के चलते इस वर्ष यह महोत्सव सितंबर माह में आयोजित किया गया। अपने अस्वस्थ होने के बावजूद अजय मिश्र ने यह दृढ संकल्प व्यक्त किया कि हरिहरपुर घराने की इस अमूल्य पारंपरिक कजरी एवं लोक संगीत को योगी सरकार के व्यापक सांस्कृतिक अभियानों के साथ पूर्णतः जोड़कर देश-विदेश के शीर्ष मंचों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं जनसमूह का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। पूरे कार्यक्रम का कुशल, प्रभावपूर्ण एवं मंच-संचालन कमलेश मिश्र द्वारा किया गया। इस भव्य एवं सफल आयोजन ने यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के संरक्षण, विजनरी मार्गदर्शन और स्थानीय कलाकारों की अनवरत साधना के बल पर आजमगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति आज वैश्विक पटल पर अपनी एक सशक्त एवं विशिष्ट पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है।