महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय परिसर में धूमधाम से मनाई गई गांधी व शास्त्री जयंती; ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के साथ हुआ भव्य सम्मान समारोह
आजमगढ़।
पूर्वी उत्तर प्रदेश को शिक्षा, तकनीक और शोध के राष्ट्रीय नक्शे पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से स्थापित महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ आज क्षेत्रीय युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बन चुका है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती (2 अक्टूबर) के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान, विशेष विचार गोष्ठी, प्रतिभागी सम्मान समारोह तथा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

गांधी व शास्त्री जयंती पर विचार गोष्ठी और स्वच्छता संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. संजीव कुमार, कुलसचिव अमृत लाल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और सामाजिक समरसता का जो मार्ग दिखाया, वह आज के वैश्विक दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का सादगीपूर्ण जीवन, कर्तव्यनिष्ठा और ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा हर भारतवासी को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।
कुलपति ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को दोनों महापुरुषों के अदम्य अहिंसात्मक साहस और जीवन-मूल्यों को अपने दैनिक व्यवहार में उतारना चाहिए। उन्होंने श्रमदान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने जन्मस्थान के साथ-साथ अपने कार्यस्थल को भी स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए श्रमदान करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। कुलपति ने अधिकारियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों के साथ स्वयं झाड़ू थामकर विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया और समाज को स्वच्छता का प्रत्यक्ष संदेश दिया।
नशामुक्त युवा भारत अभियान के प्रतिभागी सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों के तहत आयोजित ‘नशामुक्त युवा भारत अभियान’ की विविध प्रतियोगिताओं के विजयी छात्र-छात्राओं को कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कुलपति ने विद्यार्थियों से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त कर एक समरस समाज के निर्माण में सहयोग देने की अपील की।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव अमृत लाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 2 अक्टूबर केवल एक औपचारिक जयंती मनाने का दिन नहीं है, बल्कि दोनों महापुरुषों के उच्च आदर्शों को अपनी कार्यशैली में ढालने का अवसर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप यह भव्य आयोजन विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ आजमगढ़ और मऊ के समस्त सम्बद्ध महाविद्यालयों में भी सादगी और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है।
मंच का कुशल संचालन राजनीति विज्ञान की मेधावी छात्रा प्रतिष्ठा चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के समन्वयक डॉ. देवेंद्र कुमार, डॉ. शशि प्रकाश, डॉ. मनीषा, डॉ. हरेंद्र, डॉ. परमानंद, डॉ. सचिन, डॉ. भंवर लाल, विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश सिंह, विभिन्न संकायों के प्रवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अस्थाई परिसर से 64 एकड़ के अत्याधुनिक धाम तक का सफर
वर्ष 2019 में स्थापित महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय की शुरुआती प्रशासनिक एवं शैक्षणिक गतिविधियां रायदोपुर स्थित दयानंद स्नातकोत्तर (डीएवी) पीजी कॉलेज के परिसर में अस्थाई कार्यालय बनाकर संचालित की जा रही थीं।
क्षेत्र में उच्च शिक्षा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए आजमगढ़-मऊ मार्ग पर ग्राम असपालपुर में लगभग ₹108 करोड़ से अधिक की लागत से 64 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में विश्वविद्यालय के भव्य और अत्याधुनिक मुख्य परिसर का निर्माण कराया गया। इस भव्य धाम का शिलान्यास देश के गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था। प्रशासनिक, शैक्षणिक और आवासीय भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय अपने स्थाई परिसर में पूरी तरह स्थानांतरित हो चुका है और नए परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों का यह दूसरा सफल वर्ष है। वर्तमान में आजमगढ़ और मऊ जिले के 438 से अधिक महाविद्यालय इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं।
‘डबल इंजन’ सरकार के विज़न से बदला पूर्वांचल का शैक्षणिक परिदृश्य
पूर्वांचल के शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने और मेधावी युवाओं के बड़े शहरों की ओर पलायन को रोकने में केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की ‘डबल इंजन’ नीति की निर्णायक भूमिका रही है। आजमगढ़, जो कभी उच्च शिक्षा के लिए अन्य जिलों पर निर्भर था, आज इस विश्वविद्यालय के माध्यम से एक प्रमुख ‘एजुकेशन हब’ के रूप में स्थापित हो चुका है। सरकार द्वारा दिए गए पर्याप्त बजट और समयबद्ध विकास योजनाओं के बल पर परिसर में आधुनिक डिजिटल क्लासरूम, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाएं, समृद्ध ई-लाइब्रेरी और खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप बहुआयामी संकाय व पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए रोजगारपरक और शोध-आधारित पाठ्यक्रमों की विस्तृत श्रृंखला शुरू की गई है:
कला एवं समाजशास्त्र संकाय: हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, प्राचीन इतिहास व पुरातत्व, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, गृह विज्ञान, रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन तथा दृश्य एवं ललित कला।
विज्ञान एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी संकाय: गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, औद्योगिक रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, समेकित विज्ञान (Integrative Science) तथा कंप्यूटर साइंस (B.E. Computer Science, AI, Machine Learning व Data Science)।
व्यावसायिक, कृषि व विधि संकाय: बी.बी.ए., वाणिज्य (B.Com/M.Com), पत्रकारिता एवं जनसंचार (JMC), फूड टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर बिजनेस मैनेजमेंट, बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि, विधि (B.A. LL.B / LL.B), एम.एड., बी.पी.एड., एम.पी.एड. तथा विभिन्न विषयों में शोध (Ph.D.) कार्यक्रम।
शोध एवं सांस्कृतिक धरोहर (रांगेय राघव शोधपीठ): भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय साहित्य और उच्च अनुसंधान को गति देने के लिए परिसर में स्थापित ‘रांगेय राघव शोधपीठ’ विशेष आकर्षण का केंद्र है।