
आजमगढ़, 22 जून 2026।
जनपद के तहसील सगड़ी क्षेत्र अंतर्गत घाघरा/सरयू नदी के बाढ़ कटान प्रभावित ग्राम देवारा खास राजा, गंगापुर एवं आसपास के क्षेत्रों का जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तटबंध पर चौपाल आयोजित कर स्थानीय ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी समाधान के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम ग्राम देवारा खास राजा में लगभग 5.40 करोड़ रुपये की लागत से संचालित 10 ठोकर प्वाइंट (बाढ़ प्रतिरोधक कार्य) का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण करते हुए नदी के प्रवाह एवं कटान क्षेत्र का अवलोकन किया तथा पूर्व वर्षों में आई बाढ़ के दौरान उत्पन्न समस्याओं की जानकारी स्थानीय लोगों से प्राप्त की। जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खण्ड को निर्देशित किया कि समस्त बाढ़ प्रतिरोधक कार्य जून माह के अंत तक पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि संभावित बाढ़ से पूर्व आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
निरीक्षण के दौरान तटबंध पर आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने बाढ़ एवं कटान के कारण खेतों के सीमांकन तथा संदर्भ बिंदुओं (रेफरेंस प्वाइंट) के अभाव में खेती करने में आने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ लोग अधिक भूमि पर अवैध रूप से खेती कर रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सगड़ी को निर्देशित किया कि खतौनी में दर्ज भूमि के अनुसार ही जुताई एवं बुआई सुनिश्चित कराई जाए तथा भूमि विवादों का नियमानुसार निस्तारण किया जाए।
ग्रामीणों द्वारा यह भी शिकायत की गई कि जिन परिवारों के मकान पूर्व में बाढ़ कटान में बह चुके हैं, उनके नाम पर अभी भी विद्युत बिल जारी हो रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिशासी अभियंता विद्युत को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की सूची तैयार कर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की जाए।
जन शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का सत्यापन करने हेतु जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सगड़ी को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतकर्ताओं से मौके पर ही दूरभाष पर वार्ता करने के निर्देश दिए। शिकायतकर्ताओं ने अपनी समस्याओं के समाधान की पुष्टि की, जिससे शिकायत निस्तारण प्रणाली की प्रभावशीलता का भी परीक्षण हुआ।
ग्राम देवारा खास राजा से लौटते समय जिलाधिकारी ने मौजा बगहवा में वाहन रुकवाकर ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के बच्चों सृष्टि व आदित्य से शिक्षा एवं मध्याह्न भोजन योजना के संबंध में जानकारी ली तथा शासन द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान वृद्धावस्था पेंशन से वंचित दो बुजुर्ग महिलाओं गुलैची वदुर्गावती की समस्या संज्ञान में आने पर उन्होंने खण्ड विकास अधिकारी को तत्काल आवेदन कराकर पेंशन स्वीकृत कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने बाढ़ राहत शिविर के रूप में चिन्हित वर्मा श्यामदुलारी महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज नैनीजोर का भी निरीक्षण किया। प्रबंधन द्वारा बताया गया कि दोनों संस्थानों में लगभग 80 कक्ष उपलब्ध हैं, जहां बाढ़ की स्थिति में लगभग 1600 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा सकती है। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद में चिन्हित सभी 14 बाढ़ राहत शिविरों को पूर्ण रूप से सक्रिय कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
इसके पश्चात जिलाधिकारी ग्राम गंगापुर पहुंचे, जहां उन्होंने बाढ़ कटान रोकने हेतु निर्मित किए जा रहे 10 ठोकर प्वाइंट का निरीक्षण किया। तटबंध पर आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने बताया कि आबादी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगभग 150 मीटर क्षेत्र में तीन अतिरिक्त ठोकर प्वाइंट बनाए जाने की आवश्यकता है। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेते हुए अधिशासी अभियंता बाढ़ खण्ड को तत्काल प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों द्वारा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता संबंधी समस्या उठाई गई। बताया गया कि निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित है, जहां बाढ़ के दौरान पहुंचना कठिन हो जाता है। इस पर जिलाधिकारी ने एसीएमओ को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए शंकरपुर में चिकित्सकीय व्यवस्था पुनः संचालित कर एक मेडिकल ऑफिसर की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
चौपाल में ग्रामीणों ने गो-आश्रय स्थल की आवश्यकता भी व्यक्त की। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को भूमि चिन्हांकन कर आवश्यकतानुसार गो-आश्रय स्थल विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही गंगापुर से आगे स्थित जर्जर पुलिया की मरम्मत की मांग पर खण्ड विकास अधिकारी को स्थल निरीक्षण कर शीघ्र मरम्मत कराने हेतु निर्देशित किया गया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने तटबंध के समीप स्थित ग्रामीण रमेश की झोपड़ी में जाकर व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। वहां विद्युत मीटर स्थापित पाए जाने पर उन्होंने ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्रवासियों द्वारा वैध विद्युत कनेक्शन लेकर जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया गया है।
ग्रामीणों ने स्थानीय लेखपाल विपिन सिंह के कार्यों की प्रशंसा करते हुए बताया कि उन्होंने पूर्व बाढ़ों के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है। जनहित में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए जिलाधिकारी ने उनके नाम को आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किए जाने हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित सभी ग्रामों में पंचायत निधि से कम से कम एक मध्यम आकार की नाव की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) गम्भीर सिंह, उप जिलाधिकारी सगड़ी श्याम प्रताप सिंह, डीसी मनरेगा राम उदरेज यादव, बाढ़, विद्युत एवं सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, संबंधित खण्ड विकास अधिकारी, एई/जेई, आपदा विशेषज्ञ चंदन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।