
आजमगढ़: खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी एवं ग्रामोद्योग विकास एवं सतत् प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन हरिऔध कला केन्द्र, आजमगढ़ में किया गया। इस अवसर पर मण्डल स्तरीय खादी सेमिनार का भी आयोजन किया गया, जिसमें खादी के प्रचार-प्रसार, शोध, डिजाइन, मानकीकरण तथा कारीगरों के उत्साहवर्धन पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड से ऐसे 02-02 ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया, जिनके द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर खादी एवं ग्रामोद्योग योजनाओं के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक उद्योग इकाइयों की स्थापना कराई गई है। इन ग्राम प्रधानों को पुरस्कार स्वरूप ₹2000 की धनराशि आरटीजीएस के माध्यम से, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि मा. विजय बहादुर पाठक, सदस्य विधान परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षाविद् दीपक राय, मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार, जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी दीपक मिश्रा तथा जिला दिव्यांग सशक्तिकरण अधिकारी शांत प्रकाश श्रीवास्तव के साथ संयुक्त रूप से ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आयोजित मण्डल स्तरीय खादी सेमिनार में खादी संस्थाओं के पदाधिकारी, कत्तिन-बुनकर तथा खादी से जुड़े कारीगरों की सहभागिता रही। खादी के प्रचार-प्रसार तथा कारीगरों के उत्साहवर्धन के उद्देश्य से उन्हें प्रेरित करते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
मुख्य अतिथि मा. विजय बहादुर पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि खादी को नई पहचान देने और उसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि खादी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रही है। महात्मा गांधी जी ने खादी को स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक बनाया था। आज भी खादी लाखों कत्तिनों और बुनकरों के रोजगार और आजीविका का प्रमुख आधार है।
मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा ने खादी संस्थाओं, पदाधिकारियों और कारीगरों से आह्वान किया कि वे गुणवत्ता, नवाचार और समर्पण के साथ कार्य करते हुए खादी को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खादी आंदोलन निरंतर आगे बढ़ेगा और कारीगरों के जीवन में समृद्धि लाएगा।
कार्यक्रम में बिजनेस एक्सपर्ट दीपक राय द्वारा खादी के विकास पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। उन्होंने खादी संस्थाओं को आधुनिक पैकेजिंग, डिजाइनिंग तथा निर्यात की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि बदलते समय में खादी के पारंपरिक स्वरूप के साथ-साथ नवीन शोध, आकर्षक डिजाइन और गुणवत्ता का मानकीकरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि खादी उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खादी संस्थाओं और कारीगरों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि कत्तिन और बुनकर भाई-बहनों के श्रम, समर्पण और कला के कारण ही खादी की पहचान बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कारीगरों के हाथों से निर्मित प्रत्येक धागा केवल वस्त्र नहीं होता, बल्कि उसमें हमारी परंपरा, संस्कृति और स्वावलंबन की भावना समाहित होती है। उन्होंने खादी के व्यापक प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता तथा युवाओं को खादी से जोड़ने पर बल दिया।
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी दीपक मिश्रा ने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनसामान्य को लाभान्वित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में रविश कुमार दुबे वरिष्ठ सहायक,
श्यामपाल सोंकार वरिष्ठ सहायक,खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, कत्तिन-बुनकर, विभिन्न विकास खण्डों के ग्राम प्रधान एवं बड़ी संख्या में खादी से जुड़े कारीगर उपस्थित रहे।