
आजमगढ़: वर्तमान समय में बढ़ते डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार के ‘नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस माह’ (NCSAM) के तहत आजमगढ़ पुलिस एक्शन मोड में है। बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. श्री अनिल कुमार के निर्देशन में श्री महादेव शिक्षण संस्थान, खैरा रानी की सराय में एक वृहद साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन से बचने की दी गई सलाह
थाना साइबर क्राइम की टीम ने क्षेत्राधिकारी सदर श्रीमती आस्था जायसवाल के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं को आधुनिक दौर के खतरों से आगाह किया। पुलिस टीम ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
डिजिटल अरेस्ट का डर: फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डराना और पैसे ऐंठना।
सेक्सटॉर्शन का जाल: फेसबुक पर अनजान लड़कियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने और वीडियो कॉल के जरिए होने वाली ब्लैकमेलिंग से बचने की सख्त हिदायत दी गई।
फर्जी ऐप्स: मोबाइल में अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड करने से होने वाली ठगी।
इन्वेस्टमेंट स्कैम: कम समय में पैसा दोगुना करने वाले गेमिंग और निवेश ऐप्स की हकीकत बताई गई।
हेल्पलाइन नंबर 1930: आपका सबसे बड़ा हथियार
कार्यशाला में पुलिस टीम ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है।
”गोल्डन ऑवर” (ठगी के तुरंत बाद) में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से ठगी गई राशि को फ्रीज कराया जा सकता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
किसी भी अजनबी की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।
अनजान नंबर से वीडियो कॉल आने पर उसे रिसीव न करें, और यदि करना पड़े तो कैमरे को ढक कर रखें।
क्यूआर कोड (QR Code) सिर्फ पैसे भेजने के लिए होता है, प्राप्त करने के लिए नहीं।
अपनी बैंक डिटेल्स और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
कार्यक्रम में मौजूद टीम
इस जागरूकता अभियान को सफल बनाने में साइबर क्राइम थाने के मुख्य आरक्षी कल्लू प्रसाद, आरक्षी संजय कुमार, महिला आरक्षी प्रियंका गौड़ और संज्ञा देवी का विशेष योगदान रहा। टीम ने लाउडहेलर और पम्पलेट के माध्यम से गांव के आम लोगों को भी जागरूक किया।