
आजमगढ़: आदर्श चुनाव आचार संहिता और धारा 144 के उल्लंघन से जुड़े 17 साल पुराने एक मामले में पूर्व सांसद डॉ. संतोष कुमार सिंह को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज अनुपम त्रिपाठी ने साक्ष्यों के अभाव में पूर्व सांसद को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी (दोषमुक्त) कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला साल 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है। उस समय जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू की गई थी। आरोप था कि 30 मार्च 2009 को तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी डॉ. संतोष कुमार सिंह ने अपने 50-60 समर्थकों के साथ शहर के सिविल लाइन चौराहे पर बिना अनुमति के जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की थी।
इस मामले में तत्कालीन शहर कोतवाल ने डॉ. संतोष सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत में क्या हुई दलीलें?
मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद के अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह पाराशर ने पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष की दलीलों में कहा गया कि राजनीतिक द्वेष के चलते यह मामला बनाया गया था और इसमें कोई ठोस सच्चाई नहीं है।
गवाहों की स्थिति: अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में कुल चार गवाह पेश किए गए।
कोर्ट का निष्कर्ष: अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और गवाहों के बयानों का बारीकी से अध्ययन किया। जज अनुपम त्रिपाठी ने पाया कि अभियोजन पक्ष डॉ. सिंह के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा।
फैसला: साक्ष्यों की कमी को आधार मानते हुए एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पूर्व सांसद डॉ. संतोष कुमार सिंह को दोषमुक्त घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है।